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God has given you fixed time to breathe — never forget that.
 

मंथन-
यह यात्रा मेरे लिए केवल एक यात्रा नहीं,
बल्कि मेरे अंतर्मन में उठते अनगिनत विचारों का एक तूफ़ान है।
शायद यह पहली बार है जब मैंने स्वयं इस विचारों के सागर में
एक मंथन रचने का प्रयास किया है—
और उसके पश्चात् कुछ अमृत प्राप्त करने की इच्छा जगी है।

यह भी सत्य है कि लालसा मनुष्य को कमजोर बनाती है,
परंतु यह याद रखना आवश्यक है कि हम देवभूमि की यात्रा पर हैं।
यहाँ दर्शन केवल शुद्ध मन से और बिना किसी पाने की इच्छा के ही संभव है।
मनुष्य जीवन में हम इसी दर्शन को अमृत के समान मानते हैं—
और इस खोज, इस संघर्ष, इस मार्ग को अपना कर्म क्षेत्र मानकर आगे बढ़ते हैं।

समुद्र मंथन के समय भी अमृत यूँ ही नहीं मिला था।
कठिन संघर्ष के बाद ही अमृत की प्राप्ति हुई थी—
और उस दौरान अनेक रत्न भी प्राप्त हुए थे।

मंथन के दौरान भगवान शिव ने पहला जल—
हलाहल विष—अपने कंठ में धारण किया
और “नीलकंठ” कहलाए।

मैं यहाँ हम सभी के जीवन को इसी मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास कर रहा हूँ।
सरल शब्दों में कहूँ तो—
मंथन हमारे जीवन की नींव है।
हम प्रतिदिन इससे गुजरते हैं,
पर बहुत कम लोग इसके महत्व को समझ पाते हैं।

क्या आपको नहीं लगता कि आपके जीवन में होने वाली अनेक घटनाओं का संबंध भी
इसी मंथन से है?

जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे,
आपको अनुभव होगा कि पवित्र मानसरोवर का जल आपको
ना केवल सीख देगा,
बल्कि जब भी आप इस यात्रा पर आएंगे
आपकी दृष्टि और गहरी, और स्पष्ट हो जाएगी।

अडिग, अविचल, अद्भुत कैलाश पर्वत आपको वह शक्ति प्रदान करेगा,
जिससे आप अपनी कर्मभूमि में अपने कर्तव्यों और
खुली आँखों से देखे सपनों को
पूर्ण गति दे सकेंगे।

मैं यह भूमिका इसलिए भी लिख रहा हूँ
ताकि आप आने वाले रास्तों का अनुमान लगा सकें
और कठिनाइयों को पार करने में समर्थ बनें।

यह मेरी यात्रा का विवरण है—
इसे आपको याद नहीं करना है,
क्योंकि आपकी यात्रा अलग है,
आपका उद्देश्य अलग है,
और संभव है कि आपका मार्ग भी भिन्न हो।

परंतु…
हम सब पहुँचेंगे एक ही स्थान पर—
देवभूमि पर।

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