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There is a super power which guides us all every moment. Learn to listen to that inner voice.
 

वो कहते हैं ना—
जो जब होना है, वह तब ही होगा।
इसलिए मनुष्य का कर्तव्य बस इतना है कि वह निरंतर आगे बढ़ता रहे,
वह भी अपने ऊपर विश्वास रखते हुए।

कदम बढ़ाना हमारा काम है,
उस कदम का पूर्ण होना—ईश्वर की कृपा।
पर विश्वास के साथ उठाया गया कदम हमेशा सफलता की ओर ही बढ़ता है।

यह यात्रा का विवरण भी ऐसा ही एक कदम है—
विश्वास से उठाया हुआ कदम।
और जब कदम महादेव की ओर बढ़ते हैं,
तो वे पीछे लौटने के लिए नहीं,
आगे बढ़ने के लिए ही होते हैं।

संभव है कि इस यात्रा में कठिनाइयाँ हों,
परीक्षाएँ हों, और शायद इसके अलावा बहुत कुछ न मिले…
पर जो मिलता है, वही आपको आपके जीवन के
सबसे मूल्यवान पलों का आधार दे जाता है।

जब मैंने कहा कि यात्रा कठिन है,
तो उसका अर्थ केवल शारीरिक पीड़ा नहीं था—
बल्कि यह भी कि आपको इंसान के कई स्वरूपों से परिचित होना पड़ेगा।
ऐसे स्वरूप, जिनकी आप कल्पना भी न करते हों।
पर मनुष्य यही है—भावनाओं, संबंधों, संघर्षों और मूल्यों का एक विराट स्वरूप।

जीवन—
प्रेम, तपस्या, कर्तव्य, आभार, मित्रता, त्याग, क्रोध, छल, कपट, उल्लास, निष्ठा, उदारता, दमन…
ऐसी सैकड़ों भावनाओं का मिश्रण है
जो युगों से मानव हृदय में विद्यमान हैं।
यही संसार का आधार भी है—
जहाँ देव हैं, वहाँ दानव भी हैं।
जहाँ छल है, वहाँ उसे ध्वंस करने वाली शक्ति भी है।

और आज भी यह शाश्वत सत्य है—
यदि आपका मार्ग सत्य का है,
तो विजय निश्चित रूप से आपकी ही होगी।

हालाँकि आज के युग में बहुत लोग इस विचार से सहमत नहीं होते,
क्योंकि समय का पहिया तेज़ी से घूम रहा है—
कम समय में सब कुछ पा लेने की लालसा,
और उसे पाने के लिए रिश्तों तक को दाँव पर लगाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

पर मनुष्य भूल जाता है कि समय की अपनी गति होती है।
वह अपनी ही रफ़्तार से चलता है
और अपनी ही रफ़्तार से चलेगा।
हम चाहे जितना चाहें,
समय को अपनी मुट्ठी में कैद नहीं कर सकते।

आज मनुष्य खुद को इतना शक्तिशाली समझने लगा है
कि उसे भ्रम हो गया है कि
सूर्य का तेज़ और चाँद की शीतलता भी उसके इशारे पर चलती है।

यही सही समय है—
कि हम एकांत में बैठकर
केवल अर्थव्यवस्था की चिंता न करें,
बल्कि अपने जीवन-मूल्यों के अर्थ पर विचार करें।

अर्थव्यवस्था ईश्वर संभाल लेंगे—
हमें बस अपने सत्कर्मों में प्रगाढ़ होना है।
और इसके लिए सिर्फ़ अपने विचारों को
थोड़ा-सा संयमित, एकत्रित करना भर है।
इन विचारों का अंश मात्र भी समझ आ जाए,
तो वही सफलता है।
और यही—इस यात्रा-वृत्तांत का उद्देश्य भी है।

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